नेताओं का भाइयों और बहनों कहकर संबोधित करना आम बात है, लेकिन भांजे और भांजियों से संबोधन केवल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करते हैं. शिवराज सिंह का कहना है कि मध्य प्रदेश के लोग उन्हें मामा अपनापन के भाव से कहते हैं.
भारत की चुनावी राजनीति में जब धर्म, जाति और क्षेत्र के नाम पर लामबंदी अहम घटना बन गई हो ऐसे में शिवराज सिंह चौहान की मामा की छवि क्या इन सरहदों से परे है?
दिन के ग्यारह बज रहे हैं और भोपाल के सैफ़िया कॉलेज के कैंपस में एक साथ कई लड़कियां बुर्क़े में बैठी हैं. 28 नवंबर को मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने वाला है.
मतदान और प्रदेश की राजनीति पर बात करने की कोशिश की तो ज़्यादातर लड़कियों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई. आख़िरकार टीचर्स की मदद से कुछ लड़कियां तैयार हुईं.
आयशा इन्हीं में से एक हैं. आयशा से सवाल किया कि क्या शिवराज सिंह चौहान मुसलमानों के भी मामा हैं? उनका जवाब था,''हां, जी उन्होंने हमारे प्रदेश के लिए बहुत कुछ किया है और ग़रीबों पर भी ध्यान दिया है. उनकी कई योजनाओं से लोगों को फ़ायदा मिला. उनकी छवि अच्छी है.''
आयशा के बगल में ही खड़ी शाज़िया बिल्कुल अलग राय रखती हैं. वो कहती हैं, ''शिवराज सिंह चौहान ने घोषणाएं बहुत कीं लेकिन काम उस तरह से नहीं हुआ है. इधर के सालों में हिन्दू-मुसलमानों में खाई बढ़ाने की कोशिश की गई है. ये देश के लिए ठीक नहीं है.''
सैफ़िया कॉलेज में शिवराज सिंह चौहान को लेकर लोगों की राय बँटी दिखी.
साजिद अली भोपाल के जाने-माने वक़ील हैं और कांग्रेस के पदाधिकारी भी हैं. मुसलमानों के बीच शिवराज सिंह चौहान की छवि को लेकर वो कहते हैं, ''इनके ख़िलाफ़ कोई ख़ास नाराज़गी नहीं है. कुछेक चीज़ें हैं जिनसे मुसलमानों में इन पर भी संदेह बढ़ा. 31 अक्टूबर 2016 को भोपाल में पुलिस ने एनकाउंटर के नाम पर आठ लोगों को मार डाला. बिना किसी पुख्ता जांच के इन आठों को सिमी का सदस्य बता दिया गया और एक संदिग्ध एनकाउंटर को अंजाम देने वाले पुलिसकर्मियों को शिवराज सिंह ने पुरस्कृत किया. यह बिल्कुल ही नाइंसाफ़ी भरा रुख़ था.''
साजिद कहते हैं कि ऐसे ही मौक़ों पर दिग्विजय सिंह की कमी खलती हैं. वो कहते हैं, ''भले शिवराज सिंह चौहान व्यक्तिगत रूप से उदार हों लेकिन उनकी पार्टी की विचारधारा बाँटने वाली है और इसके ख़िलाफ़ वो नहीं जा सकते. दिग्विजय सिंह की धर्मनिरपेक्षता उनकी व्यक्तिगत पहचान है. अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में कहा जाता था कि सही आदमी ग़लत पार्टी में है. शिवराज सिंह चौहान को लेकर भी मुझे कमोबेश ऐसा ही लगता है.''